प्रेगनेंसी में एनीमिया कैसा महसूस होता है?HealthPlanet

Posted on Fri 16th Dec 2022 : 16:12

प्रेग्‍नेंसी में एनीमिया हो जाए तो क्‍या करना चाहिए


गर्भावस्‍था में महिलाओं के शरीर को अधिक काम करना पड़ता है और इस समय हर चीज की दोगुनी जरूरत होती है। यदि प्रेग्‍नेंसी में खून की कमी हो जाए तो एनीमिया का खतरा रहता है।

गर्भावस्‍था में एनीमिया का खतरा रहता है। एनीमिया में ऊतकों और भ्रूण तक ऑक्‍सीजन ले जाने के लिए खून पर्याप्‍त मात्रा में स्‍वस्‍थ लाल रक्‍त कोशिकाएं नहीं बना पाता है।

प्रेग्‍नेंसी के दौरान शिशु के विकास के लिए शरीर अधिक मात्रा में खून बनाता है और अगर इस दौरान आप पर्याप्‍त आयरन या अन्‍य पोषक तत्‍व नहीं ले रही हैं तो आपके शरीर में अधिक खून बनाने के लिए जरूरी लाल रक्‍त कोशिकाओं का निर्माण रुक सकता है। प्रेग्‍नेंसी में एनीमिया होना सामान्‍य बात है।


प्रेग्‍नेंसी में एनीमिया के कारण
वैसे तो एनीमिया के लगभग 400 प्रकार हैं, लेकिन यहां पर हम आपको एनीमिया के सबसे आम प्रकारों के बारे में बता रहे हैं।
आयरन डेफिशिएंसी एनीमिया : 15 से 25 साल की गर्भवती महिलाओं में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया आम बात है। इसमें आयरन का लेवल कम होने पर खून में हीमोग्‍लोबिन कम बनने लगता है।
गर्भावस्‍था में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया को कंट्रोल

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आयरन डेफिशियंसी एनीमिया एक मेडिकल स्थिति है जो कि शरीर में आयरन का स्‍तर घटने की वजह से होती है। जब शरीर पर्याप्‍त मात्रा में लाल रक्‍त कोशिकाओं का निर्माण नहीं कर पाता है, तब एनी‍मिया की स्थिति उत्‍पन्‍न होती है। यदि लाल रक्‍त कोशिकाएं ठीक तरह से कार्य न कर पाएं, तो भी एनीमिया हो सकता है।


आयरन का स्‍तर कम होने पर आपको नीचे बताए गए लक्षण दिख सकते हैं :
थकानहाथ-पैर ठंडे होनाचक्‍कर आनासीने में दर्दनाखूनों का पीला पड़नादिल की धड़कन अनियमित होनासिरदर्दशरीर का तापमान कम होनासांस फूलना

यदि आपका शरीर बाकी हिस्‍सों तक ऑक्‍सीजन पहुंचाने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में हीमोग्‍लोबिन नहीं बना पा रहा है तो आपको ऊपर बताए गए एक या उससे ज्‍यादा लक्षण दिख सकते हैं।

आमतौर पर कम मात्रा में आयरन के सेवन से आयरन डेफिशियंसी एनीमिया होता है। यदि आप आयरनयुक्‍त आहार या सप्‍लीमेंट नहीं लेते हैं या खून बहने या सिलिएक या क्रोन डिजीज के कारण ऐसा हो सकता है। इन स्थितियों में शरीर को भोजन से आयरन को अवशोषित करने में दिक्‍कत होती है।

इसके अलावा आयरन डेफिशियंसी एनीमिया पुरुषों से ज्‍यादा महिलाओं को प्रभावित करता है और गर्भधारण करने या गर्भवती महिलाओं को इसका खतरा ज्‍यादा रहता है। गर्भावस्‍था में सामान्‍य विकास के लिए अत्‍यधिक आयरन की जरूरत होती है, खासतौर पर प्रेग्‍नेंसी के दूसरे हिस्‍से में।
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अगर प्रेग्‍नेंसी से पहले एनीमिया का निदान हो तो सबसे पहले आपको ये पता लगाना चाहिए कि आपको किस प्रकार का एनीमिया हुआ है।विटामन बी12 की कमी या फोलेट की कमी और लाल रक्‍त कोशिकाओं में गड़बड़ी जैसे कि सिकेल सेल या थैलेसीमिया जैसे कारणों से एनीमिया होने का पता लगाने के लिए डॉक्‍टर टेस्‍ट कर सकते हैं।

पीरियड्स के दौरान ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने की वजह से भी फर्टिलिटी उम्र में महिलाओं में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया हो सकता है। गर्भावस्‍था से पहले एनीमिया का इलाज वहीं है जो प्रेग्‍नेंसी में एनीमिया का होता है। इसमें आयरन युक्‍त आहार और आयरन के सप्‍लीमेंट से इलाज किया जाता है। जिन महिलाओं को माहवारी के दौरान ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने पर आपको गायनेकोलोजिस्‍ट से परामर्श अवश्‍य करना चाहिए।

प्रेग्‍नेंसी से पहले दिए जाने वाले विटामिनों (प्रीनैटल विटामिन) में आयरन होता है। आयरन युक्‍त प्रीनैटल विटामिन गर्भावस्‍था के दौरान आयरन डेफिशियंसी एनीमिया के इलाज और उसे रोकने में मदद कर सकता है। कुछ मामलों में डॉक्‍टर अगल से आयरल सप्‍लीमेंट लेने के लिए कह सकते हैं। गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं को प्रतिदिन 27 मि.ग्रा आयरन की जरूरत होती है।

गर्भावस्‍था के दौरान सही पोषण लेकर भी आयरन डेफिशियंसी एनीमिया से बचा जा सकता है। रेड मीट, अंडा और मछली आयरन के बेहतरीन स्रोत होते हैं। इसके अलावा आप मटर, बींस और अनाज से भी आयरन ले सकती हैं।

भोजन से प्राप्‍त आयरन के शरीर में अवशोषण को बढ़ाने के लिए उच्‍च विटामिन सी खाद्य एवं पेय पदार्थों का सेवन करें। इसमें संतरे का जूस, टमाटर का जूस और स्‍ट्रॉबेरी शामिल हैं।


डिलीवरी के बाद और प्रसव के पहले कुछ हफ्तों एवं महीनों में कई महिलाओं में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया के लक्षणों में सुधार देखा जाता है। डिलीवरी के बाद अक्‍सर आयरन डेफिशियंसी एनीमिया कम हो जाता है क्‍योंकि इस दौरान स्‍तनपान के कारण मासिक धर्म की ब्‍लीडिंग कम हो जाती है।

वहीं कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद भी आयरन डेफिशियंसी एनीमिया की समस्‍या बनी रह सकती है। ऐसा गर्भावस्‍था के दौरान पर्याप्‍त आयरन न लेने और डिलीवरी के दौरान ज्‍यादा खून बहने की वजह से होता है। डिलीवरी के बाद एनीमिया से चिंता, तनाव और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।

इस दौरान महिलाओं को एनर्जी बनाए रखने के लिए आयरन के सप्‍लीमेंट लेने चाहिए। अपने आहार में आयरन और विटामिन-सी युक्‍त चीजों को शामिल करें।

इस तरह फर्टिलिटी की उम्र की महिलाएं आयरन डेफिशियंसी एनीमिया से बच सकती है और समय पर इसका इलाज करवा अपनी और अपने शिशु की रक्षा कर सकती हैं।



फोलेट डेफिशिएंसी एनीमिया : प्रेग्‍नेंसी में अधिक मात्रा में फोलिक एसिड लेने की जरूरत होती है। ये बच्‍चे को न्‍यूरल ट्यूब विकारों से बचाता है। फोलेट की कमी होने पर यह एनीमिया होता है।

विटामिन बी12 डेफिशिएंसी : लाल रक्‍त कोशिकाओं के निर्माण में शरीर विटामिन बी12 का भी उपयोग करता है। कुछ महिलाओं को विटामिन बी12 बनाने में दिक्‍कत आती है जिससे कि इस प्रकार का एनीमिया हो सकता है। अक्‍सर विटामिन बी12 और फोलेट डेफिशिएंसी एनीमिया एकसाथ पाया जाता है।

प्रेग्‍नेंसी में एनीमिया के लक्षण
गर्भावस्‍था में एनीमिया के लक्षण इस प्रकार हैं :

त्‍वचा, होंठों और नाखूनों का पीला पड़ना
थकान और कमजोरी महसूस होना
सांस लेने में दिक्‍कत
दिल की धड़कन तेज होना
ध्‍यान लगाने में दिक्‍कत आना

शुरुआती चरण में एनीमिया के लक्षण दिखना जरूरी नहीं है। इसकी सही समय पर पहचान के लिए नियमित ब्‍लड टेस्‍ट करवाते रहें।

गर्भावस्‍था में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया को कंट्रोल

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आयरन डेफिशियंसी एनीमिया एक मेडिकल स्थिति है जो कि शरीर में आयरन का स्‍तर घटने की वजह से होती है। जब शरीर पर्याप्‍त मात्रा में लाल रक्‍त कोशिकाओं का निर्माण नहीं कर पाता है, तब एनी‍मिया की स्थिति उत्‍पन्‍न होती है। यदि लाल रक्‍त कोशिकाएं ठीक तरह से कार्य न कर पाएं, तो भी एनीमिया हो सकता है।



आयरन का स्‍तर कम होने पर आपको नीचे बताए गए लक्षण दिख सकते हैं :
थकानहाथ-पैर ठंडे होनाचक्‍कर आनासीने में दर्दनाखूनों का पीला पड़नादिल की धड़कन अनियमित होनासिरदर्दशरीर का तापमान कम होनासांस फूलना

यदि आपका शरीर बाकी हिस्‍सों तक ऑक्‍सीजन पहुंचाने के लिए पर्याप्‍त मात्रा में हीमोग्‍लोबिन नहीं बना पा रहा है तो आपको ऊपर बताए गए एक या उससे ज्‍यादा लक्षण दिख सकते हैं।

आमतौर पर कम मात्रा में आयरन के सेवन से आयरन डेफिशियंसी एनीमिया होता है। यदि आप आयरनयुक्‍त आहार या सप्‍लीमेंट नहीं लेते हैं या खून बहने या सिलिएक या क्रोन डिजीज के कारण ऐसा हो सकता है। इन स्थितियों में शरीर को भोजन से आयरन को अवशोषित करने में दिक्‍कत होती है।

इसके अलावा आयरन डेफिशियंसी एनीमिया पुरुषों से ज्‍यादा महिलाओं को प्रभावित करता है और गर्भधारण करने या गर्भवती महिलाओं को इसका खतरा ज्‍यादा रहता है। गर्भावस्‍था में सामान्‍य विकास के लिए अत्‍यधिक आयरन की जरूरत होती है, खासतौर पर प्रेग्‍नेंसी के दूसरे हिस्‍से में।
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अगर प्रेग्‍नेंसी से पहले एनीमिया का निदान हो तो सबसे पहले आपको ये पता लगाना चाहिए कि आपको किस प्रकार का एनीमिया हुआ है।विटामन बी12 की कमी या फोलेट की कमी और लाल रक्‍त कोशिकाओं में गड़बड़ी जैसे कि सिकेल सेल या थैलेसीमिया जैसे कारणों से एनीमिया होने का पता लगाने के लिए डॉक्‍टर टेस्‍ट कर सकते हैं।

पीरियड्स के दौरान ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने की वजह से भी फर्टिलिटी उम्र में महिलाओं में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया हो सकता है। गर्भावस्‍था से पहले एनीमिया का इलाज वहीं है जो प्रेग्‍नेंसी में एनीमिया का होता है। इसमें आयरन युक्‍त आहार और आयरन के सप्‍लीमेंट से इलाज किया जाता है। जिन महिलाओं को माहवारी के दौरान ज्‍यादा ब्‍लीडिंग होने पर आपको गायनेकोलोजिस्‍ट से परामर्श अवश्‍य करना चाहिए।


प्रेग्‍नेंसी से पहले दिए जाने वाले विटामिनों (प्रीनैटल विटामिन) में आयरन होता है। आयरन युक्‍त प्रीनैटल विटामिन गर्भावस्‍था के दौरान आयरन डेफिशियंसी एनीमिया के इलाज और उसे रोकने में मदद कर सकता है। कुछ मामलों में डॉक्‍टर अगल से आयरल सप्‍लीमेंट लेने के लिए कह सकते हैं। गर्भावस्‍था के दौरान महिलाओं को प्रतिदिन 27 मि.ग्रा आयरन की जरूरत होती है।

गर्भावस्‍था के दौरान सही पोषण लेकर भी आयरन डेफिशियंसी एनीमिया से बचा जा सकता है। रेड मीट, अंडा और मछली आयरन के बेहतरीन स्रोत होते हैं। इसके अलावा आप मटर, बींस और अनाज से भी आयरन ले सकती हैं।

भोजन से प्राप्‍त आयरन के शरीर में अवशोषण को बढ़ाने के लिए उच्‍च विटामिन सी खाद्य एवं पेय पदार्थों का सेवन करें। इसमें संतरे का जूस, टमाटर का जूस और स्‍ट्रॉबेरी शामिल हैं।
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डिलीवरी के बाद और प्रसव के पहले कुछ हफ्तों एवं महीनों में कई महिलाओं में आयरन डेफिशियंसी एनीमिया के लक्षणों में सुधार देखा जाता है। डिलीवरी के बाद अक्‍सर आयरन डेफिशियंसी एनीमिया कम हो जाता है क्‍योंकि इस दौरान स्‍तनपान के कारण मासिक धर्म की ब्‍लीडिंग कम हो जाती है।

वहीं कुछ महिलाओं को डिलीवरी के बाद भी आयरन डेफिशियंसी एनीमिया की समस्‍या बनी रह सकती है। ऐसा गर्भावस्‍था के दौरान पर्याप्‍त आयरन न लेने और डिलीवरी के दौरान ज्‍यादा खून बहने की वजह से होता है। डिलीवरी के बाद एनीमिया से चिंता, तनाव और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।

इस दौरान महिलाओं को एनर्जी बनाए रखने के लिए आयरन के सप्‍लीमेंट लेने चाहिए। अपने आहार में आयरन और विटामिन-सी युक्‍त चीजों को शामिल करें।

इस तरह फर्टिलिटी की उम्र की महिलाएं आयरन डेफिशियंसी एनीमिया से बच सकती है और समय पर इसका इलाज करवा अपनी और अपने शिशु की रक्षा कर सकती हैं।


गर्भावस्‍था में किसे है एनीमिया का खतरा
अगर आपके गर्भ में जुड़वा या इससे ज्‍यादा बच्‍चे हैं, प्रेगनेंट होने से कुछ समय पहले ही आपकी डिलीवरी हुई हो,आहार में पर्याप्‍त मात्रा में आयरन की कमी, प्रेग्‍नेंसी से पहले पीरियड में अधिक खून आना और मॉर्निक सिकनेस की वजह से रोज उल्‍टी होने की समस्‍या से ग्रस्‍त महिलाओं में एनीमिया का खतरा ज्‍यादा होता है।

प्रेग्‍नेंसी में एनीमिया का इलाज
यदि आपको गर्भावस्‍था के दौरान एनीमिया हो गया है तो आपको आयरन और/या फोलिक एसिड के सप्‍लीमेंट लेने शुरू कर देने चाहिए। डॉक्‍टर आपको बताएंगे कि आयरन और फोलिक एसिड की पूर्ति के लिए आपको अपने आहार में किन खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए।

विटामिन बी12 की कमी होने पर डॉक्‍टर आपको विटामिन बी12 के सप्‍लीमेंट लेने के लिए कह सकते हैं। आहार में विटामिन बी12 युक्‍त चीजों को भी शामिल कर आप एनीमिया का इलाज कर सकती हैं।


बचाव के लिए क्‍या करें
यदि आप गर्भवती हैं या गर्भधारण करना चाहती हैं तो आपको पर्याप्‍त मात्रा में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्‍वों को अपनी डायट में शामिल कर लेना चाहिए। पौष्टिक आहार लें और एनीमिया के लक्षण दिखने पर डॉक्‍टर से बात करें।
गर्भावस्‍था में एनीमिया होने से शिशु को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं इसलिए बेहतर होगा कि आप कंसीव करने से पहले ही प्रीनैटल विटामिनों के जरिए इसके जोखिम को कम करने की कोशिश करें।

solved 5
wordpress 3 years ago 5 Answer
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